हिंदुस्तान में मुस्लिमो की कुल आबादी तकरीबन २५ करोड़ है और जिसमे की आधी आबादी मुस्लिम महिलाओं की है यानि की १२.५ करोड़| तीन तलाक एक ऐसा मुद्दा है जो प्रत्यक्ष रूप से देश कुल महिलाओं की २५ फीसदी आबादी को प्रभावित करती है| एक ऐसी कुप्रथा एक ऐसा अभिशाप जो जीते जी एक विवाहित महिला को कब्र में दफन कर देती है और जब तक वो महिला वैवाहिक जीवन में है तब तक अपने अधिकारों गला घोंट कर पूरा जीवन भर मर्दों की गुलामी करती है ताकि कभी इस अभिशाप का सामना न करना पड़े|

जिस मामले में देश के सबसे पुरानी कांग्रेस को महिलाओं के हक में खड़ा हुआ दिखना चाहिए था उस मामले में कांग्रेस वोट बैंक पॉलिटिक्स खेल रही है| अपनी नीच राजनीती के कारण शिखर से शून्य तक पहुची कांग्रेस आज भी तीन तलाक पर अपना रुख साफ़ नहीं की है और तो और इस कुप्रथा को मुस्लिमो के आस्था का सवाल बताकर मुस्लिम महिलाओं के हक की लड़ाई में समथन न देने का अप्रत्यक्ष प्रयास कर रही है| कांग्रेस चाहती तो इस मुद्दे पर मुस्लिम महिलाओं के साथ खड़े होकर वो उन्हें इस अभिशाप से मुक्ति दिला सकती थी पर कांग्रेस की नियत में ही खोट है|

1986  में जब  शाहबानो केस में सुप्रीम कोर्ट ने शाहबानो के पक्ष अपना फैसला सुनाया तब कट्टर मुस्लिम संगठनो ने इसका उग्र विरोध किया और “आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड” का गठन किया| मुस्लिम संगठनो के इस कड़े विरोध को शांत करने के लिए तथाकथित सेक्युलर राजीव गाँधी (तत्कालीन प्रधानमंत्री) ने संसद का विशेष  सत्र बुलाकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला बदल दिया और मुस्लिम महिलाओं को उनके हक से वंचित कर दिया|

आज यही पर्सनल लॉ बोर्ड तीन तलाक के केस में मुस्लिम महिलाओं के खिलाफ लड़ रही है और इनका वकील है कांग्रेस के दिग्गज नेता और कांग्रेस सरकारों के पूर्व केंद्र मंत्री कपिल सिबल| कपिल सिबल ने जो दलीले कोर्ट में पेश की है वो मुस्लिम महिलाओं की घनघोर विरोधी है| इन दलीलों से एक बात तो साफ होता है कांग्रेस नेता कपिल सिबल इस मौके को वोट बैंक को साधने में प्रयोग करना चाहता है|

कपिल सिबल ने कोर्ट में कहा ” तीन तलाक मुस्लिमो के आस्था से जुड़ा मसला है यह 1400 वर्षो से practice में है और इसे ऐसे ही चलते देना चाहिए”| इसका मतलब यह हुआ तीन तलाक भले ही मुस्लिम महिलाओं की ज़िन्दगी बर्बाद कर रही हो पर इसे इस लिए चलते देना चाहिए क्यूंकि मुस्लिम मर्द ऐसा चाहते है| कपिल सिबल का यह भी कहना है कि “जिस प्रकार राम मंदिर हिन्दुओं की आस्था का प्रश्न है उसी प्रकार तीन तलाक़ मुस्लिम महिलाओं की आस्था का सवाल है”| तो क्या यह मान लिया जाये कि मुस्लिमो की आस्था महिलाओं के जीवन बर्बाद करने में है? जो मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड कहती आयी है कि राम मंदिर हिन्दुओं की आस्था का प्रश्न नहीं बल्कि जमीन का प्रश्न है वो अब अपने पुराने स्टैंड से पीछे हट रही है?

यह एक सामाजिक कुप्रथा का मसला है जिसे सभी वर्गों को आगे आकर मिटाने का प्रयास करना चाहिए था पर कांग्रेस इसे वोट बैंक का माध्यम बनाकर मुस्लिम महिलाओं को हासिये पर धकेलने का प्रयास कर रही है| ७० वर्षो की इसी गन्दी राजनीती का ही परिणाम है जो कांग्रेस आज हासिये पर आ चुकी है|

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